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<title>जाट क्रॉनिकल &#45; : साहित्य</title>
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<description>जाट क्रॉनिकल &#45; : साहित्य</description>
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<dc:rights>© जाट क्रॉनिकल 2025  &#45; All Rights Reserved.</dc:rights>

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<title>थाल सजाकर गौरव का, चले हैं पूजने वीर प्रसूता</title>
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<description><![CDATA[ थाल सजाकर गौरव का, चले हैं पूजने वीर प्रसूता,लोहागढ का दंभ पूजने, नमन सूरज की पौरूषता,चले झूमते मस्ती में हम, ना अपना पथ आये भूल, वहीं हमारा दीप जलेगा, चढेगा वहीं विजयी फूल,ना देख सकूं निज जीवन, ना दृष्टि ईश दर्शन को है तरसी, बस देख लूं लोहागढ को, मेरी आंखे बरसों से है प्यासी,ना प्रयाग रामेश्वर गंगाकूल, इधर ना हरिद्वार काशी,इसी जगह है तीर्थ हमारा भीषण गरजे जाटवंशी,अपने अचल स्वतंत्र दुर्ग पर, सुनकर बैरी की बोली,निकल पड़ी लेकर तलवारें, जहां जाट जवानों की टोली, रानियों ने जहां देशहित, पति संग समर लड़ते देखा,जिस मिट्टी की रक्षा खातिर, बच्चे बच्चे को मरते देखा, जहां जवाहर ने तांडव रचाया, दिल्ली की ज्वाला पर, क्षणभर वहीं समाधि लगेगी, बैठ उसी मृग-छाला पर,वह आकुल रहती थी असी, प्रणय मिलन नरमुंडो से,थे भिड़ाते अपने वज्र वक्षों को, वे जाटवीर गजसुंडो से,शरणागत को देव समझ वे, नहीं डरे ललकारों से, रण को प्रिय खेल समझ वे, जीत छीनते भयहारों से, तुर्क फिरंगी अर रजपूतों का, दर्प पिघलाया सर-कृपाणों से, वे भीषण क्रोधी लोहागढ के, नहीं मोह पाले कभी प्राणों के,है नमन तुम्हें शत शत जाटवीरों, घमंड नहीं गर्व बोल रहा मेरा,इसी लोहागढ की प्राचीरों से, था निकला स्वतंत्रता का सवेरा,&#039;तेजाभक्त&#039; पूजन करने आया, रक्ततिलक करने भाल कपालों पे,कर दिये शीश अर्पण जाटवीरों, काट काट अरिनालों पे,.... -लेखक- Balveer Ghintala &#039;तेजाभक्त&#039; मकराना नागौर  9414980415--- ------ ]]></description>
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<pubDate>Tue, 07 Mar 2023 02:06:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<title>अमर हो गया जाटों का सूरज, दे गया गौरवगान हमें</title>
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<description><![CDATA[ बच रही थी जागीरें जब, बहु बेटियों के डोलों से,तब एक सूरज निकला, ब्रज भौम के शोलों से,दिन नही मालूम मगर, थी फरवरी सत्रह सो सात,जब पराक्रमी बदन के घर, पैदा हुआ बाहुबली जाट,था विध्वंश था प्रलय, वो था जिता जागता प्रचंड तूफां,तुर्कों के बनाये साम्राज्य का, मिटा दिया नामो निशां,खेमकरण की गढी पर, बना कर लोहागढ ऊंचा नाम किया,सुजान नहर लाके उसने, कृषकों को जीवनदान दिया,बात है सन् 1748 की, जब मचा बगरू में हाहाकार,7 रजपूती सेनाओ का, अकेला सूरज कर गया नरसंहार,इस युद्ध ने इतिहास को, उत्तर भारत का नव यौद्धा दिया,मुगल मराठों का कलेजा, अकेले सूरज ने हिला दिया,मराठा मुगल रजपूतो ने, मिलकर एक मौर्चा बनाया,मगर छोटी गढी कुम्हेर तक को, यह मौर्चा जीत न पाया,घमंड में भाऊ कह गया, नहीं चाहिए जाटों की ताकत,मराठों की दुर्दशा बता रहा, तृतीय समर ये पानीपत,अब्दाली के सेना ने जब, मराठों की औकात बताई,रानी किशोरी ने ही तब, शरण में लेके इनकी जान बचाई,दंभ था लाल किले को खुद पे, कहलाता आगरे का गौरव था,सूरज ने उसकी नींव हीला दी, जाटों की ताकत का वैभव था,बलशाली था हलधर अवतारी था, था जाटों का अफलातून,जाट प्लेटो गजमुखी वह, फौलादी जिस्म गर्वीला खून,हारा नहीं कभी रण में, ना कभी धोके से वार किया,दुश्मन की हर चालों को, हंसते हंसते ही बिगाड़ दिया,ना केवल बलशाली था, बल्कि विधा का ज्ञानी था,गर्व था जाटवंश के होने का, न घमंडी न अभिमानी था,25 दिसंबर 1763 में, नजीबद्दीन से रणसमर हुआ,सहोदरा की माटी में तब, इसका रक्त विलय हुआ,56 वसंत की आयु में भी, वह शेरों से खुला भिड़ जाता था,जंगी मैदानों में तलवारों से, वैरी मस्तक उड़ा जाता था,वीरों की सदा यह पहचान रही है, रणसमर में देते बलिदान है,इस सूरज ने वही इतिहास रचा, शत शत तुम्हें प्रणाम है,अमर हो गया जाटों का सूरज, दे गया गौरवगान हमें,कर गया इतिहास उज्ज्वल, दे गया इक अभिमान हमें,&#039;तेजाभक्त बलवीर&#039; तुम्हें वंदन करे, करे नमन चरणों में तेरे,सदा वैभवशाली तेरा शौर्य रहे, सदा विराजो ह्रदय में मेरे,लेखक-बलवीर घिंटाला तेजाभक्त मकराना नागौर9414980515 ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Apr 2017 02:05:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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<title>नित नित पूजनीय कर्म तेरे, सदा अमर है तू गोकुल वीर</title>
<link>https://hindi.jatchronicle.com/your-daily-worshipable-deeds-you-are-always-immortal-gokul-veer</link>
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<description><![CDATA[ था इस्लाम का दौर जहां, कटते थे सर बागियों के, मंदिरों के दिये बुझ चुके, सुनते थे कलमें नमाजियों के,  उस काल में हाहाकार मचा, औरंगजेब के तांडव का, मर रही थी जनता सारी, नाद थे करते नित रणभैरव का,  सिनसिनी थी ब्रज की रानी, शेरों की जननी कहलाती थी, जाटों का बाहुबल जाहिर था, खेतों में तलवारें लहलहाती थी,  हर किसान यहां का बागी था, था भैरवी सी हुंकार लिये, हल तलवार साथ था रखता, जाट नंदराम का आगाज लिये,  इसी नंदराम की गद्दी पर, आसीन हुआ फिर जलजला, ब्रज में जिसकी तूती बोलती, जनता कहती इसे गॉड गोकुला,  वीर बड़ा महावीर बड़ा, था वीरभद्र सा विकराल मनुज, अकेला तुर्कों पर भारी रहा, डर जाते तुफां भी सम्मुख,  किसान कौम की ताकत का, असली अहसास उसने करवाया, जब राजे महाराजे दुबक गये, उसी ने मुगलों का दंभ पिघलाया,  10 मई 1666 का भीषण रण, इतिहास बना जाट गोकुला, चंद किसानों की ताकत ने, तिलपत में ला दिया जलजला,  उत्तर भारत का पहला वीर वो, जिसने मुगलों की नाक उड़ादी, जमीर बेचके राज करने वालों की, औकात इस रण में बता दी, दरबारों की बोटियों के दम पर, इतिहास झूठे लिखे गये, असली यौद्धा दफन हो गये, कायर सियारों के थोथे शौर्य रचे गये,  जिस दुर्गादास को तुम पूज रहे, वो गोकुला का था अनुयायी, चार साल पहले ही गोकुल ने, मुगलों के छाती पे रणभेरी बजायी,  गुरू तेगबहादुर को नमन मेरा, शीश अर्पण था कर दिया, मगर 6 साल पहले ही, कौम रक्षा हेतू गोकुला था कट गया,  जब मुगलों का हर सेनापती, पिट पिट कर जाता था, भारतवर्ष के हर यौद्धा का, सीना गर्व से भर जाता था,  ना राजा आया ना महाराजा आया, न आया कोई रजपूत-मराठा, अकेला किसान जाट गोकुला, औरंगजैब की सीमा पर रहा डटा,  जब सारे षड़्यंत्र विफल हुए, उखड़ रहे थे मुगलों के पांव, भीषण सेना लेकर तब, औरंगजैब चला सिनसिनी गांव,  कितना खौफ रहा होगा, उस ब्रज भूमि के वीर प्रचंड का, मुट्ठी भर कृषक वीरों के आगे, जलसा लाया गज-तुरंग अखंड था,  उस दिन भारत ने एसा समर देखा, देखा भीषण आगाज यहां, जाटों की भारी तलवारों ने, काट दिये मुगलों के सर-ताज जहां,  रण में वीरगति चाहता था वो, मगर तुर्कों ने सोचा कुछ और था, आगरे किले की हर नींव बोल उठी, दहाड़ रहा पिंजरे में शेर था,  गोकुल का विद्रोह भयंकर था, हर हिंदुस्तानी था जाग रहा, मगर इतिहास के पन्नों में, यह वीर सदा ही बेनाम रहा, आओ मिलकर नमन करें, इस शौर्यवीर पराक्रमी मनुज को,भारत धरा के अप्रतीम साहस, पौरूष झलकता सिंहानुज को,  नमन करे वैभवमय साहस को, कलमदूत ये तेजाभक्त बलवीर, नित नित पूजनीय कर्म तेरे, सदा अमर है तू गोकुल वीर,                                   लेखक- बलवीर घिंटाला तेजाभक्त मकराना नागौर9414980415 ]]></description>
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<pubDate>Mon, 10 Apr 2017 02:05:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>admin</dc:creator>
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