अमर शहीद चंपालाल जी गील

~ अमर शहीद चंपालाल जी गील ~=पारिवारिक परिचय =शहीद चंपालाल गील का जन्म नागौर जिले के गाँव सांजू मेँ 2 फरवरी 1975 को पिता श्री मुकनाराम जी के घर माता श्रीमति मोहनीदेवी कीकोख से हुआ । आप 5 भाईयों में सबसे बड़े थे। इसलिए पारिवारिक जिम्मेदारियों का अहसास बहुत जल्दी हो गया।आपका विवाह कसणाऊ निवासी श्री चत्तराराम जी की पुत्री इंद्रा देवी के साथ सम्पन्न हुआ । आपके पुत्र कानाम महिपाल (18वर्ष) है ।=-शिक्षा =शहीद चंपालाल गील ने 12 वीं तक राजकीय विधालय, सांजू से शिक्षा ग्रहण की थी । आपमें विधार्थी जीवन से ही देशभक्ति की भावना प्रज्ज्वलित हो चुकी थी।=सेना में चयन =अध्यापन काल के दौरान ही आपने सेना मेँ जाकर भारत माँ की सेवा करने को अपना लक्ष्य बना लिया । 12 वीं तक शिक्षा करने के पश्चात आपसेना मेँ चयन हेतु जी-तोड़ मेहनत करने लगे और इस तरह वर्ष 1995 मेँ आपका चयन भारतीय सेना की "3 ग्रेनेडीयर्स रेजिमेँट" मेँ सिपाही के रूप मेँ हुआ । 28 अगस्त 1995 को आपने अपना नियुक्ती पत्र ग्रहण किया ।=देशसेवा में बलिदान =वर्ष 1998 मेँ आप श्रीनगर के मंगत सैक्टर मेँ तैनातकिये गये । उस रात इन्हेँ सूचना मिली की कुछ आतंकीभारतीस सीमा मेँ प्रवेश कर रहे हैँ । उस समय चलाये गये 'ऑपरेशन रक्षक-3' में आपने साहस व शौर्य का अप्रतीम परिचय दिया। दुश्मन की गोली लगने के कारण हमारे जाबांज सिपाही चंपालाल जी गील भारत माता के आँचल मेँचिरनिद्रा में सौ गये ।12 राष्ट्रीय रायफल के सिपाही शहीद चंपालाल गील (2688719W GDR) 5 फरवरी 1998 को आतंकवादियोँ के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए ।"किसी का चिह्न वोटोँ पे,किसी का चित्र नोटोँ पे,शहीदोँ तुम ह्रदय मेँ हो,तुम्हारा नाम होठोँ पे"=सेना मेडल =शहीद चंपालाल गील को मरणोपरांत उनके अदम्य साहस व वीरता के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया।=शहीद का अंतिम संस्कार =दिनांक 9 फरवरी 1998 को प्रात: 10:00 बजे शहीदचंपालाल का शव उनके पैतृक गांव सांजू लाया गया । समस्त ग्रामवासीयोँ की आँखे इस बेटे का मुख देखकर छलछला उठी । शहीद के अंतिम संस्कार मेँ हजारोँ की तादाद मेँ लोग इक्कठे हुए । नागौर जिलेके पदाधिकारी, राजनितिक शख्सियतोँ ने अंतिमयात्रा मेँ सम्मिलित हो शहीद को अंतिम विदाई दी ।=मूर्ति अनावरण =शहीद के भाई गोपालराम गील ने ग्राम सांजू मेँ शहीद चंपालाल की मूर्ति लगाने का निश्चय किया। दिनांक 5 जून 2013 को भव्य व विशाल मूर्ति का अनावरण किया गया । हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर उस पल को ऐतीहासिक बना दिया।समस्त देशवासियोँ को शहीद चंपालाल जी जैसे वीर सैनिको पर नाज है, जो अपने प्राणोँ की आहूति दे कर करोड़ोँ जानोँ की हिफाजत करते हैँ । शहीद चंपालाल की शहादतको देश युगोँ युगोँ तक याद रखेगा ।॥ जय हिँद ॥Source:   Jatlandलेखक -बलवीर_घिंटाला_तेजाभक्तमकराना_नागौर09414980415सहयोगकर्ता -रामकिशोर_जी_गील-----------

अमर शहीद चंपालाल जी गील
अमर शहीद चंपालाल जी गील
=पारिवारिक परिचय =

शहीद चंपालाल गील का जन्म नागौर जिले के गाँव सांजू मेँ 2 फरवरी 1975 को पिता श्री मुकनाराम जी के घर माता श्रीमति मोहनीदेवी की
कोख से हुआ । आप 5 भाईयों में सबसे बड़े थे। इसलिए पारिवारिक जिम्मेदारियों का अहसास बहुत जल्दी हो गया।
आपका विवाह कसणाऊ निवासी श्री चत्तराराम जी की पुत्री इंद्रा देवी के साथ सम्पन्न हुआ । आपके पुत्र का
नाम महिपाल (18वर्ष) है ।

=-शिक्षा =

शहीद चंपालाल गील ने 12 वीं तक राजकीय विधालय, सांजू से शिक्षा ग्रहण की थी । आपमें विधार्थी जीवन से ही देशभक्ति की भावना प्रज्ज्वलित हो चुकी थी।

=सेना में चयन
 =

अध्यापन काल के दौरान ही आपने सेना मेँ जाकर भारत माँ की सेवा करने को अपना लक्ष्य बना लिया । 12 वीं तक शिक्षा करने के पश्चात आप
सेना मेँ चयन हेतु जी-तोड़ मेहनत करने लगे और इस तरह वर्ष 1995 मेँ आपका चयन भारतीय सेना की "3 ग्रेनेडीयर्स रेजिमेँट" मेँ सिपाही के रूप मेँ हुआ । 28 अगस्त 1995 को आपने अपना नियुक्ती पत्र ग्रहण किया ।

=देशसेवा में बलिदान =

वर्ष 1998 मेँ आप श्रीनगर के मंगत सैक्टर मेँ तैनात
किये गये । उस रात इन्हेँ सूचना मिली की कुछ आतंकी
भारतीस सीमा मेँ प्रवेश कर रहे हैँ । उस समय चलाये गये 'ऑपरेशन रक्षक-3' में आपने साहस व शौर्य का अप्रतीम परिचय दिया। दुश्मन की गोली लगने के कारण हमारे जाबांज सिपाही चंपालाल जी गील भारत माता के आँचल मेँ
चिरनिद्रा में सौ गये ।
12 राष्ट्रीय रायफल के सिपाही शहीद चंपालाल गील (2688719W GDR) 5 फरवरी 1998 को आतंकवादियोँ के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए ।
"किसी का चिह्न वोटोँ पे,
किसी का चित्र नोटोँ पे,
शहीदोँ तुम ह्रदय मेँ हो,
तुम्हारा नाम होठोँ पे"

=सेना मेडल =

शहीद चंपालाल गील को मरणोपरांत उनके अदम्य साहस व वीरता के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया।

=शहीद का अंतिम संस्कार =

दिनांक 9 फरवरी 1998 को प्रात: 10:00 बजे शहीद
चंपालाल का शव उनके पैतृक गांव सांजू लाया गया । समस्त ग्रामवासीयोँ की आँखे इस बेटे का मुख देखकर छलछला उठी । शहीद के अंतिम संस्कार मेँ हजारोँ की तादाद मेँ लोग इक्कठे हुए । नागौर जिले
के पदाधिकारी, राजनितिक शख्सियतोँ ने अंतिम
यात्रा मेँ सम्मिलित हो शहीद को अंतिम विदाई दी ।

=मूर्ति अनावरण =

शहीद के भाई गोपालराम गील ने ग्राम सांजू मेँ शहीद चंपालाल की मूर्ति लगाने का निश्चय किया। दिनांक 5 जून 2013 को भव्य व विशाल मूर्ति का अनावरण किया गया । हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर उस पल को ऐतीहासिक बना दिया।
समस्त देशवासियोँ को शहीद चंपालाल जी जैसे वीर सैनिको पर नाज है, जो अपने प्राणोँ की आहूति दे कर करोड़ोँ जानोँ की हिफाजत करते हैँ । शहीद चंपालाल की शहादत
को देश युगोँ युगोँ तक याद रखेगा ।
॥ जय हिँद ॥

Source:   Jatland

लेखक -
बलवीर घिंटाला तेजाभक्त

सहयोगकर्ता -
रामकिशोर जी गील
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