कविता
थाल सजाकर गौरव का, चले हैं पूजने वीर प्रसूता
थाल सजाकर गौरव का, चले हैं पूजने वीर प्रसूता,लोहागढ का दंभ पूजने, नमन सूरज की पौरूषता,चले...
अमर हो गया जाटों का सूरज, दे गया गौरवगान हमें
बच रही थी जागीरें जब, बहु बेटियों के डोलों से,तब एक सूरज निकला, ब्रज भौम के शोलों...
नित नित पूजनीय कर्म तेरे, सदा अमर है तू गोकुल वीर
था इस्लाम का दौर जहां, कटते थे सर बागियों के, मंदिरों के दिये बुझ चुके, सुनते थे...